पंजाब डेस्क: इस बार दिवाली का पर्व विशेष ज्योतिषीय संयोग के बीच मनाया जाएगा। 8 नवंबर, रविवार को दिवाली पर करीब 50 साल बाद महालक्ष्मी जयंती योग बनने की बात कही जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु और कुबेर की पूजा का विशेष महत्व रहेगा। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। कहा जा रहा है कि इस बार दिवाली पर स्वाति नक्षत्र, तुला राशि में चंद्रमा और आधी रात में अमावस्या की उपस्थिति से महालक्ष्मी जयंती योग बन रहा है। दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के साथ कुबेर की पूजा करना भी शुभ माना जाता है।
8 नवंबर को सुबह 11:24 बजे शुरू होगी अमावस्या
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 24 मिनट पर शुरू होगी और 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी। खास बात यह है कि दिवाली की रात अमावस्या तिथि रहेगी। प्रदोष काल और आधी रात में अमावस्या की मौजूदगी को पूजा के लिए विशेष शुभ माना गया है।
धनतेरस पर प्रदोष काल में पूजा का महत्व
धनतेरस 6 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन प्रदोष काल में पूजा करना शुभ माना जाता है। सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के पुजारी पंडित श्याम सुंदर शास्त्री के अनुसार, चंडीगढ़ में 6 नवंबर को सूर्यास्त शाम 5 बजकर 22 मिनट पर होगा। इसके आसपास 45 मिनट का प्रदोष काल रहेगा, जिसमें पूजा की जा सकती है।
धनतेरस पर सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक राहुकाल रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है। वहीं सोना, चांदी, पीतल और तांबे के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि धातु के बर्तन खरीदने से घर में धन-समृद्धि बढ़ती है।





