ढाका: बांग्लादेश में गारमेंट फैक्ट्री के मजदूरों का वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहा प्रदर्शन अब हिंसक हो गया है। कई जगहों पर मजदूरों ने सड़कों और राजमार्गों पर जाम लगा दिया। इस दौरान पुलिस की गाड़ियों को आग लगा दी गई और सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया।
1 नवंबर से किया था न्यूनतम वेतन बोर्ड के गठन का ऐलान
प्रदर्शन के बीच सोशल मीडिया पर एक 10 साल के बच्चे की पुलिस की गोली लगने से मौत होने का दावा भी किया जा रहा है। हालांकि, अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है। मजदूर लंबे समय से वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। मामले को शांत करने के लिए श्रम मंत्री आरिफुल हक चौधरी ने 1 नवंबर को छह सदस्यों वाले न्यूनतम वेतन बोर्ड के गठन का ऐलान किया था। उन्होंने मजदूरों से काम पर लौटने की अपील भी की, लेकिन इसका प्रदर्शन पर कोई खास असर नहीं पड़ा।
देश में अशांति फैलाना चाहते हैं लोग
वहीं, गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने आरोप लगाया है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और सीमा पार मौजूद कुछ लोग मजदूरों को भड़काकर देश में अशांति फैलाना चाहते हैं। उनका कहना है कि इसके पीछे गारमेंट उद्योग के उत्पादन और निर्यात को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो सकती है। श्रम मंत्री ने भी हिंसा के लिए अवामी लीग के समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में गारमेंट उद्योग की अहम भूमिका है। देश के कुल निर्यात में इस उद्योग का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा है और लगभग 40 लाख लोग इससे जुड़े हुए हैं। देश की जीडीपी में भी इसका योगदान करीब 10 प्रतिशत है।
अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के सत्ता से हटने के बाद से बांग्लादेश आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहा है। महंगाई और धीमी विकास दर पहले ही देश के लिए चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे में अगर मजदूरों का आंदोलन लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका असर कपड़ों के उत्पादन, निर्यात और लाखों लोगों के रोजगार पर पड़ सकता है।





