वॉशिंगटन: अमेरिका के मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections 2026) में डेमोक्रेटिक पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रिपब्लिकन पार्टी से सीनेट की सत्ता छीन ली है। इतना ही नहीं, पार्टी ने प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी बहुमत हासिल कर लिया है। इस नतीजे को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी नीतियों के खिलाफ जनता के बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
डेमोक्रेट्स ने सीनेट की कम से कम छह रिपब्लिकन सीटों पर जीत दर्ज की। पार्टी ने नॉर्थ कैरोलाइना, साउथ कैरोलाइना, टेक्सास, ओहायो, कंसास और आयोवा जैसे राज्यों में उलटफेर किया। इनमें से कई राज्य पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन पार्टी के मजबूत गढ़ माने जाते रहे हैं।
कंसास में 94 साल बाद डेमोक्रेट्स की वापसी
कंसास में पादरी एडम हैमिल्टन ने रिपब्लिकन उम्मीदवार रोजर मार्शल को हराकर बड़ी जीत दर्ज की। इस जीत के साथ कंसास से डेमोक्रेट्स ने 1932 के बाद पहली बार सीनेट सीट हासिल की। टेक्सास में जेम्स टालारिको और साउथ कैरोलाइना में एनी एंड्रयूज की जीत भी डेमोक्रेट्स के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है।
ओहायो में पूर्व सीनेटर शेरोड ब्राउन ने रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन हस्टेड को हराया, जबकि आयोवा में जोश ट्यूरेक ने जीत दर्ज कर रिपब्लिकन सीट डेमोक्रेट्स के खाते में डाल दी।
महंगाई और ईरान युद्ध ने बिगाड़ा ट्रंप का गणित
चुनाव में महंगाई, रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती कीमतें, ट्रंप की गिरती लोकप्रियता और ईरान के साथ युद्ध जैसे मुद्दे रिपब्लिकन पार्टी के लिए भारी पड़ते दिखाई दिए। मतदाताओं की नाराजगी का असर उन राज्यों में भी दिखा, जहां पिछले चुनावों में ट्रंप को मजबूत समर्थन मिला था।
अब ट्रंप के फैसलों पर कांग्रेस की नजर
सीनेट और हाउस दोनों में बहुमत मिलने के बाद डेमोक्रेट्स के पास ट्रंप प्रशासन पर निगरानी रखने की अधिक ताकत होगी। वे सरकारी फैसलों पर सुनवाई कर सकते हैं, अधिकारियों को समन भेज सकते हैं और प्रशासन के खिलाफ जांच शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा ट्रंप के कई विधायी प्रस्तावों को रोकने की स्थिति में भी होंगे।
हालांकि, राष्ट्रपति के पास किसी विधेयक को वीटो करने का अधिकार बना रहेगा। वहीं सीनेट में फिलिबस्टर जैसे संसदीय नियम भी डेमोक्रेट्स के लिए कुछ फैसलों को आसानी से पारित करना मुश्किल बना सकते हैं।
कुल मिलाकर, इन नतीजों ने ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के आखिरी दो वर्षों के लिए अमेरिकी राजनीति की तस्वीर बदल दी है। अब व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच टकराव बढ़ने की संभावना है।





