जालंधर: कांग्रेस भवन के बाहर बनी दुकानों को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में दुकानदारों को झटका लगा है। दुकानों को गिराने के मामले में दायर अपील अदालत ने खारिज कर दी है। इससे नगर निगम की ओर से अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
यह विवाद जिला कांग्रेस कमेटी (अर्बन) के राजिंदर नगर स्थित कार्यालय के निर्माण से जुड़ा है। मामले में निर्माण नियमों के उल्लंघन और नगर निगम की जमीन पर अतिक्रमण किए जाने के आरोप लगाए गए थे। इसको लेकर मामला पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा था।
2016 के फैसले में दिए गए थे सख्त निर्देश
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, 19 सितंबर 2016 को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश गुरनाम सिंह ढिल्लों की अदालत ने जिला कांग्रेस कमेटी और उसके तत्कालीन अध्यक्ष अरुण वालिया की अपील खारिज कर दी थी।
फैसले में कहा गया था कि संबंधित अवैध निर्माण को अपीलकर्ताओं को 15 दिनों के भीतर अपने खर्च पर हटाना होगा। ऐसा नहीं किए जाने पर नगर निगम को अगले 15 दिनों में निर्माण गिराने और उसका खर्च संबंधित पक्षों से वसूलने के निर्देश दिए गए थे।
मनीत मल्होत्रा और अजय जोशी ने उठाया था मामला
इस विवाद की शुरुआत मनीत मल्होत्रा और अजय जोशी की ओर से दायर याचिका से हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यालय के निर्माण में नियमों का उल्लंघन हुआ है और नगर निगम की जमीन पर अतिक्रमण किया गया है। संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की मांग के बाद मामला अदालत तक पहुंचा।
अब नगर निगम की कार्रवाई पर नजर
दुकानों को गिराने के आदेशों के खिलाफ संबंधित दुकानदारों की ओर से दायर अपील अब खारिज हो गई है। हालांकि, नगर निगम की ओर से तोड़फोड़ कब की जाएगी, इस बारे में अभी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
अब आगे की स्थिति अदालत के ताजा आदेश और नगर निगम की कार्रवाई पर निर्भर करेगी। इस मामले में अगला अहम कदम यह होगा कि निगम पुराने आदेशों को लागू करने के लिए क्या कार्रवाई करता है।





