पंजाब डेस्क: पंजाब में सरकारी बसों से सफर करने वाले यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है। पंजाब रोडवेज, पनबस और PRTC के कच्चे कर्मचारियों ने 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी नहीं की जा रही हैं। इसके विरोध में उन्होंने विधानसभा सत्र का घेराव करने और मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने की भी योजना बनाई है।
जानकारी के अनुसार गुरुवार को फिरोजपुर डिपो में हुई बैठक के दौरान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने सत्ता में आने से पहले कर्मचारियों से कई वादे किए थे, लेकिन अब तक उन्हें पूरा नहीं किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले 5 साल में परिवहन विभाग में एक भी नई सरकारी बस शामिल नहीं की गई।
11 साल से काम कर रहे कर्मचारियों को भी नहीं किया पक्का
रेशम सिंह गिल ने कहा कि कई कर्मचारी करीब 11 साल से विभाग में काम कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें नियमित नहीं किया गया है। यूनियन की मांग है कि कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए, आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म की जाए और सरकारी बसों की संख्या बढ़ाई जाए।
सरकार के साथ 70 से 75 बैठकें, फिर भी समाधान नहीं
यूनियन नेताओं के मुताबिक, अपनी मांगों को लेकर सरकार के साथ 70 से 75 बार बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। यूनियन के प्रदेश सचिव शमशेर सिंह ढिल्लों ने कहा कि कर्मचारियों को नियमित करने से संबंधित प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग में नियमों को लागू नहीं किया जा रहा, जिसके कारण लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों पर दर्ज केस वापस लेने की मांग
यूनियन ने पिछले प्रदर्शनों के दौरान कर्मचारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी की है। शमशेर सिंह ढिल्लों ने आरोप लगाया कि अपने अधिकारों और विभाग के निजीकरण के विरोध में आवाज उठाने वाले कर्मचारियों पर मामले दर्ज किए जा रहे हैं। यूनियन ने साफ किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। यदि हड़ताल होती है, तो पंजाब में बस सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।





