नई दिल्ली। पंजाब में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में कानूनी लड़ाई ने नया मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस शील नागू ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। वहीं, पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें CBI को केस दर्ज कर आरोपों की जांच करने के निर्देश दिए गए थे।
CJI के पास भेजा जाएगा मामला
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि मामले को किसी दूसरी पीठ के सामने सुनवाई के लिए रखने का फैसला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के समक्ष रखा जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा पीठ के सामने सुनवाई जारी रहने पर आपत्तियां उठ सकती हैं।
जस्टिस दत्ता ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियां काफी मुश्किल हैं और पता नहीं कब, कहां से हमला हो जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में 17 अन्य पीठ हैं और मामले को दूसरी पीठ को सौंपने के लिए आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए जाएंगे।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति से पहले जस्टिस शील नागू पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के पद पर कार्यरत थे।
CM के OSD राजबीर घुमन को हाईकोर्ट से राहत नहीं
दूसरी ओर, पंजाब के मुख्यमंत्री के OSD राजबीर घुमन को भी इस मामले में हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। उनकी याचिका पर सुनवाई करने से सिंगल बेंच ने इनकार कर दिया।
जानकारी के मुताबिक, घुमन ने गुरुवार को CBI जांच को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। उन्होंने जांच एजेंसी की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन फिलहाल उन्हें इस मामले में राहत नहीं मिल सकी है।
पंजाब की राजनीति और कानूनी गलियारों में मामले पर नजर
मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों और CBI जांच को लेकर यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में आगे बढ़ेगा। दूसरी पीठ को मामला सौंपे जाने के बाद सुनवाई की दिशा क्या रहती है और पंजाब सरकार की चुनौती पर अदालत क्या रुख अपनाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
नोट: मामले में भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप कथित हैं। अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के फैसलों पर निर्भर करेगा।





