नई दिल्ली: कथित ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी आवाज तेज कर दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने राष्ट्रपति भवन पहुंचा।
प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य कथित वोट चोरी और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपना था। इससे पहले संसद भवन से राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च निकाल रहे INDIA गठबंधन के अन्य सांसदों को पुलिस ने विजय चौक पर रोक दिया।
राष्ट्रपति मुर्मू से मिलने पहुंचे कई विपक्षी नेता
इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता शामिल रहे। मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और ममता बनर्जी के अलावा जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, NCP (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले, RJD के मनोज झा और VCK प्रमुख थोल. थिरुमावलवन भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे।
इसके अलावा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ईटी मोहम्मद बशीर, माकपा महासचिव एमए बेबी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी राजा भी राष्ट्रपति से मिलने पहुंचे। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नाम राष्ट्रपति भवन को पहले ही भेज दिए गए थे।
‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च के जरिए विपक्ष ने दिखाई एकजुटता
शुक्रवार को विपक्षी सांसदों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च निकाला। इस मार्च में INDIA गठबंधन के सांसद राष्ट्रपति भवन की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें विजय चौक पर रोक दिया।
इससे पहले विपक्षी सांसद संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में एकत्र हुए थे। यहां कथित वोट चोरी के मुद्दे पर आंदोलन आगे बढ़ाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।
SIR और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष का विरोध तेज
विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल हैं। इसी मुद्दे पर विपक्ष राष्ट्रपति के सामने अपनी चिंताएं रखने और मामले में हस्तक्षेप की मांग करने के लिए आगे आया है।
राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और ममता बनर्जी जैसे प्रमुख नेताओं की मौजूदगी को विपक्षी एकजुटता के तौर पर देखा जा रहा है। अब इस घटनाक्रम पर राजनीतिक हलकों की नजर है और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन के बाद आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
नोट: ‘वोट चोरी’ विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों के संदर्भ में इस्तेमाल किया गया है। इसे किसी सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि राजनीतिक आरोप के तौर पर देखा जाना चाहिए।





