नेशनल डेस्क: दिल्ली-NCR में बढ़ता वायु प्रदूषण महिलाओं की सेहत के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हवा में मौजूद PM 2.5 जैसे बारीक प्रदूषक कणों के लंबे समय तक संपर्क में रहने और महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य के बीच संभावित संबंधों को लेकर शोध किया जा रहा है। शुरुआती अध्ययनों में वायु प्रदूषण और महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य के कुछ पहलुओं के बीच संबंध के संकेत मिले हैं। हालांकि, प्रदूषण को प्रजनन अंगों के कैंसर का सीधा कारण मानने के लिए अभी और शोध की जरूरत है।
फोर्टिस गुरुग्राम में स्त्री कैंसर सर्जन और स्त्री कैंसर विज्ञान एवं रोबोटिक सर्जरी विभाग की अध्यक्ष डॉ. रमा जोशी ने बताया कि PM 2.5 पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। लंबे समय तक इन कणों के संपर्क में रहने से शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव जैसी प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं। ये बदलाव शरीर की जैविक प्रक्रियाओं पर असर डाल सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्त्री रोग संबंधी कैंसर के पीछे कोई एक कारण नहीं होता। इसमें कई तरह के कारक भूमिका निभा सकते हैं, जिनमें पर्यावरण से जुड़े कारक भी शामिल हो सकते हैं। ऐसे में यह समझने के लिए शोध जारी है कि वायु प्रदूषण महिलाओं में कैंसर के जोखिम को प्रभावित कर सकता है या नहीं।
डॉ. जोशी के अनुसार, प्रदूषण और कैंसर के बीच सीधे कारणात्मक संबंध की पुष्टि करने के लिए भारत से जुड़े अधिक आंकड़ों और विस्तृत अध्ययनों की आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने महिलाओं को सलाह दी है कि वे अपनी सेहत के प्रति जागरूक रहें और उन जोखिम कारकों पर ध्यान दें, जिन्हें नियंत्रित किया जा सकता है या जिनकी समय-समय पर निगरानी जरूरी है।





